TourismNetarhat - Queen of Chhotanagpur

Netarhat – Queen of Chhotanagpur

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Netarhat – Queen of Chhotanagpur :- हमलोग जैसे ही किसी पहाड़ी पर्यटन स्थलों का नाम लेते हैं तो हमारे जेहान में “शिमला और मनाली” का नाम आ ही जाता है। लेकिन हमारे झारखंड में भी एक ऐसी पहाड़ी पर्यटन स्थल है जिसे आप देखेंगे तो बाकि पर्यटन स्थलों (Tourists Place) भुल जाएंगे। वह है :- नेतरहाट – छोटानागपुर की रानी ( Netarhat – Queen of Chhotanagpur ) या ( Netarhat – The Hill Station of Jharkhand ) ।

Netarhat - Queen of Chhotanagpur

हम बात कर रहे हैं झारखंड (छोटानागपुर) के लातेहार जिले के खूबसूरत वादियों में बसे ” नेतरहाट / Netrahat ” के बारे में। जिसे लोग प्राकृतिक सुंदरता के कारण “पहाड़ों की मल्लिका (Queen of Mountains)” तथा “छोटानागपुर की रानी (Queen of Chhotanagpur)” भी कहते हैं।

दोस्तों चलिए आज के इस Article में हम जानेंगे कि :- 

  • Netarhat कहां स्थित है ?
  • नेतरहाट का इतिहास क्या है ? 
  • Netarhat कैसे पहुंचे ?
  • नेतरहाट / Netarhat का मौसम कैसा रहता है ? 
  • Netarhat के सामने कौन सा पर्यटन स्थल है ? 

Table of Contents

नेतरहाट कहां स्थित है ? Where is Located Netarhat ?

नेतरहाट, झारखंड (छोटानागपुर पठार) के लातेहार जिला में स्थित है। झारखण्ड जो अपने खनिज सम्पदा और प्राकृतिक संसाधनों के लिए देश ही नहीं वरन विदेशों में भी प्रशिद्ध है। जब भी आप झारखण्ड घूमने का सोचते हैं तो आपके मन में जरूर एक बार इस जगह :- नेतरहाट – छोटानागपुर की रानी ( Netarhat – Queen of Chhotanagpur ) या ( Netarhat – The Hill Station of Jharkhand ) का ख्याल जरूर आता होगा।

Netarhat झारखण्ड की सबसे सुन्दर और मनभावन जगह है जहाँ पर लोगों का ताँता लगा रहता है , खास कर यहाँ का सूर्योदय और सूर्यास्त को देखना बहुत ही सुन्दर और आनंद का एहसास करता है। साथ ही साथ Netarhat की प्राकृतिक दृश्य आपको अपने और अनायास ही आकर्षित करती है।

नेतरहाट कैसे पहुंचे ? How to Reach Netarhat ?

रांची – घाघरा रोड से आप आसानी से नेतरहाट पहुंच सकते हैं । मैदानी इलाकों से होते हुए Netarhat पहुंचना मस्ती भरे सफर का हिस्सा होता है। यह जगह अपने अंदर प्रकृति की सभी सुंदरताओं को संजोये हुए है तथा शैलानियों के स्वागत में हमेशा बांहें फैलाये तैयार रहता है। Netarhat की खड़ी – खड़ी पहाड़ियाँ उसमें से ज्यादातर साल, पलाश, केंदु, नीलगिरी, चीड़, नाशपाती और महुआ के पेड़ों से आच्छादित हैं।

Netarhat - Queen of Chhotanagpur

खड़ी पहाड़ी सड़क (घाटी वाली सड़क) जंगलों के बीचों – बीच में अवस्थित है जो काफ़ी तीखे मोड़ों से होकर गुजरती हुयी आगे बढ़ती है। फिर एक जगह पर पहुँचते हैं जहां पर सरू और देवदार के पेड़ों के बीच 3,696 फीट (1,250 मीटर) की ऊंचाई पर नेतरहाट स्थित है। यहाँ एक विशाल, सुन्दर और सुसज्जित स्वागत द्वार नेतरहाट / Netarhat में आपका स्वागत करता है। यहाँ पर जो भी आता है यहाँ के प्रसिद्व Netarhat विद्यालय, लोध झरना, उपरी घाघरी झरना तथा निचली घाघरी झरना देखना नही भूलते है।

नेतरहाट का इतिहास क्या है ? History of Netarhat ?

भारत देश के झारखण्ड राज्य के लातेहार जिले के दक्षिण-पूर्व दिशा में और झारखंड की राजधानी रांची से 156 किमी पश्चिम में लातेहार जिले में नेतरहाट / Netarhat स्थित है। जिसे प्रकृति ने भी फुरसत से संवारा और सजाया है। ऊँचे – निचे पहाड़ियों, हरे – भरे जंगलों और झर – झर गिरती पहाड़ी झरनों से घिरा Netarhat काफ़ी आकर्षक और मनमोहक है यहां का प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा है कि लोगों को नेतरहाट की वादियां बिलकुल धरती पर स्वर्ग होने का एहसास दिलाती हैं। 

जो कोई भी यहां पर एक बार चला जाए, उसे बार – बार जाने का जी ललचाए ।

Netarhat – छोटानागपुर की रानी

जो भी एक बार नेतरहाट घूमने जाता है वह जिदंगी भर यहाँ पर बिताये अनमोल पलों को नहीं भूल पाता है। यही कारण है कि यहां पर आए ब्रिटिश अधिकारियों का ये काफ़ी पसंदीदा स्थान था। ये स्थान बहुत ही सुन्दर तथा आरामदायक है जिसके चलते अंग्रेज लोग यहां ठहरना पसंद करते थे। यहां का मौसम ठण्ड रहता यही कारण है की लोगों ने इसे Netarhat – छोटानागपुर की रानी ( Netarhat – Queen of Chhotanagpur ) या ( Netarhat – The Hill Station of Jharkhand ) का नाम दिया है । नेतरहाट का तापमान साल भर रांची की तुलना में ठंडा रहता है। यह कहा जा सकता है कि यह स्थान पूरे झारखंड राज्य में सबसे ठंडा स्थान है।

समुद्री तट से नेतरहाट / Netarhat की ऊंचाई 3,696 फीट (1,250 मीटर) है। ये पहाड़ी क्षेत्र है जिसके चलते इस इलाके में बहुत सारे Waterfalls हैं तथा अधिकतर हिस्से में घने जंगलों का फैलाव है। इस घने जंगल में मिलने वाले कुछ प्रमुख वृक्ष हैं – सागवान, सखुआ, पलाश, महुआ और बांस।

नेतरहाट का अर्थ ? Meaning Of Netarhat ?

नेतरहाट शब्द की उत्पति मूलतः ‘नेतुर और हातु’ शब्द के मिलने से हुआ है। नेतुर का अर्थ होता है बांस और हातु का मतलब बाजार। लोगों का कहना है कि यहां कभी बांस का बाजार लगा करता था। इसी कारण इसका नाम नेतरहाट पड़ा। कहावत यह भी है कि अंग्रेजी के शब्द नेचर और हार्ट आपस में मिलकर Netarhat बन गए। नेतरहाट / Netarhat यकीनन पकृति का हृदय स्थल लगता है। Netarhat पठार के निकट की पहाड़ियां सात पाट कहलाती हैं। जिनके नाम क्रमशः नेतरहताट पाट, पसेरी पाट, जोभी पाट, जमूडूरापाट तथा दासवानपाट आदि हैं।

यहाँ के स्थानीय भाषा के अनुसार नेतरहाट का मतलब होता है ” बांस का बाजार (Market of Bamboo) “। इस इलाके के ग्रामीण बुजुर्ग बताते हैं कि बांस की इस क्षेत्र अधिकता होने के कारण इस स्थान का नाम नेतरहाट पड़ा। साथ ही साथ ये भी कहा जाता है की नेतरहाट शब्द की उत्पत्ति ” नेचर हाट ” से हुई है जो समय के साथ – साथ नेतरहाट शब्द में परिवर्तित हो गया।

नेतरहाट / Netarhat के कुछ ख़ास स्थान –

Netarhat में बहुत सारे जगह घूमने के लिए हैं जहाँ पर आप घूम सकते हैं।

SL No.Place
नेतरहाट आवासीय विद्यालय
2मैग्नोलिया प्वाइंट / सनसेट प्वाइंट (Sunset 🌄 Point) 
3सनराइज प्वाइंट (Sunrise 🌅 Point)
4कोयल दृश्य बिंदु (Koyal View Point) 
5नासपाती बागान
6देवदार एवं चीड़ के जंगल
7शैले हाउस ( Shaile House)
8लोध फॉल / बूढ़ा घाघ जलप्रपात
9नीचे घघरी जलप्रपात (Lower Ghaghri Fall)
10ऊपर घघरी जलप्रपात (Upper Ghaghri Fall)
11सदानी फॉल्स (Sadani Fall)
12सुरकाई घाघरी जलप्रपात (Surkai Ghaghri Fall)
13पलामू बंगला

नेतरहाट आवासीय विद्यालय, नेतरहाट

नेतरहाट आवासीय विद्यालय ( Netarhat Residential School ) को झारखंड की शान माना जाता है। ये विद्यालय अपने स्थापना काल से ही, पहले तो बिहार राज्य में और अब झारखंड राज्य में बोर्ड की परीक्षा (Board Exam) में प्रथम दस स्थान पाने वाले अधिकांश विद्यार्थी इसी विद्यालय से आते रहे हैं। बोर्ड की परीक्षा (Board Exam) के अलावा इस विद्यालय के विद्यार्थी राष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (National Mathematics Champion) , राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (National आदि परिक्षाओं में भी हमेशा आगे ही रहते हैं। 

Netarhat - Queen of Chhotanagpur

इंडियन पब्लिक स्कूल कांफ्रेस के संस्थापक सदस्य और ऋषि वेली स्कूल के प्राचार्य एफ. जे. पायर्स ने सन् 1951 ई. में इस विद्यालय की स्थापना की योजना बनाई थी। अंततः इस विद्यालय की स्थापना 15 नवम्बर 1954 ई. में हुई थी चार्ल्स नेपियर इस विद्यालय के प्रथम प्रधानाचार्य थे . पहले बैच में 60 Students को 1954 में छः वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश दिया गया था। 1982 के बाद से लड़कों की संख्या को बढ़ाकर 100 कर दी गई।

राज्य सरकार द्वारा स्थापित और गुरुकुल की तर्ज पर बने इस स्कूल में अभी भी प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर ही प्रवेश मिलता है। यहां 10-12 आयु वर्ग के बच्चों को ही प्रवेश दिया जाता है और लड़कों को उच्चतर माध्यमिक परीक्षा के लिए तैयार किया जाता है। यहां Class 6 & 9 में ही बच्चों को Admission लिया जाता है।

मैग्नोलिया प्वाइंट (Magnolia Point)

मैग्नोलिया प्वाइंट (Magnolia Point) जो कि सूर्यास्त (Sunset 🌄) के खूबसूरत नज़ारों के लिए जाना जाता है। कोहरे से सूर्योदय (Sunrise ⛅) भले ही बाधित हो लेकिन यहां का सूर्यास्त देखने लायक होता है। इस खूबसूरत जगह से आप ढलते हुए सूरज के आकर्षक दृश्य को देख सकते हैं। यहां पर जब आप ढलते हुए सूरज को देखेंगे तो पूरा आसमान नारंगी रंग का दिखाई देता है जो देखने में काफ़ी सुन्दर लगता है। इस जगह से आप ढलते हुए सूर्य को देखेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे कि सूर्य इसी जगह नीचे घुस गया। 

Netarhat - Queen of Chhotanagpur

स्थानीय प्रशासन ने मैगनोलिया प्वाइंट को अच्छे से सजाया है जहाँ से आप सूर्यास्त का बेहतरीन नज़ारा देख सकते हैं। यदि आप इस जगह जल्दी पहुंचते हैं तो आप कुछ समय उस दृश्य बिंदु (View Point) पर बिता सकते हैं जहाँ से कोयल नदी को नीचे की हरी-भरी पहाड़ियों से गुजरते हुए देख सकते हैं।

Netarhat से करीब 61 किलोमीटर की दूरी लोध जलप्रपात स्थित है। यदि जंगल-पहाड़ों के रास्ते से पैदल जाऐं तो सिर्फ 15 -17 किलोमीटर की दूरी ही तय करनी पड़ती है। मैगनोलिया प्वाइंट से भी दूर पहाड़ों से गिरती लोध जलप्रपात के पानी की तीन पतली धाराएं गिरती दिखाई पड़ती हैं । यह जलप्रपात लगभग 468  फीट की ऊंचाई से गिरती है।

मैग्नोलिया प्वाइंट/ Magnolia Point का इतिहास / मैग्नोलिया प्वाइंट का नामकरण कैसे हुआ ?

अंग्रेज ऑफिसर की बेटी (मैग्नोलिया) व चरवाहे की अधूरी प्रेम कहानी –

स्थानीय कथाओं के अनुसार Netarhat का मौसम गर्मी के दिनों में इतना अच्छा रहता है जैसे हम किसी ठंडे परदेश में हों, जिसके कारण अंग्रेज ऑफिसर लोग अपने पूरे परिवार के साथ इस जगह पर छुट्टियां मनाने आते थे। कुछ ऑफिसर तो यहीं पर रहने लग गए थे। यहां पर एक अंग्रेज ऑफिसर (ब्रिटिश अधिकारी) की बेटी थी जिसका नाम था मैग्नोलिया और नेतरहाट गांव में ही एक चरवाहा था जिसका नाम था । मैग्नोलिया का Netarhat के चरवाहे के साथ मोहब्बत (Love) हो जाता है।

चरवाहा Sunset Point 🌄 के आस – पास प्रतिदिन अपने मवेशियों को चराया करता था। मवेशी चराने के दौरान वह एक ऊंचा पत्थर पर बैठ जाता था और इसके बाद वह बांसुरी बजाता था। बांसुरी का आवाज़ इतनी सुरीली होती थी कि जो भी एक बार इसे सुन ले वो आवाज़ की ओर खींचा चला आता। 

चरवाहे की बांसुरी के मधुर आवाज ने मैग्नोलिया के दिल को छू लिया। मैग्नोलिया मन ही मन वह बांसुरी बजाने वाले से प्रेम करने लगी। वह उसके प्यार में पागल सी हो गई, उससे मिलने के लिए बेकरार हो गई। मैग्नोलिया उसके बांसुरी का आवाज़ को सुनने के लिए अपने घोड़ा में बैठी और उस आवाज़ की ओर चल पड़ी तो ठीक सनसेट प्वाइंट के पास वो दिख गया। तो वे अपने घोड़ा से उतरी और उसके पास जाकर बैठकर बांसुरी की मधुर आवाज़ को सुनने लगी। इस तरह से हर रोज यहां पर चरवाहा उसे बांसुरी बजा कर सुनाता था।

उन दोनों का हर रोज इस तरह मिलना – जुलना धीरे – धीरे प्यार में बदल गया और दोनों दिलों – जान से एक – दुसरे से प्यार करने लगे। मैग्नोलिया हर रोज भागकर उसके प्रेमी से मिलने के आया करती थी और दोनों घंटों – घंटों एक – दुसरे से बातचीत किया करते । कुछ दिनों बाद इसकी जानकारी मैग्नोलिया के पिता अंग्रेज ऑफिसर को मिली कि उनकी बेटी हर रोज उस चरवाहे से मिलने के लिए जाती है। तब उन्होंने चरवाहे को अपनी बेटी से दूर जाने को कहा लेकिन प्यार में डूबे उस चरवाहे ने दूर जाने से मना कर दिया। फिर वे अपनी बेटी को भी चारवाहे के साथ मिलने से माना किया लेकिन उसकी बेटी भी नहीं मानने लगी । 

इतना बोलने के वाबजूद भी दोनों एक – दूसरे से मिलना नहीं छोड़ा तो गुस्से में आकर अंग्रेज अधिकारी ने उस चरवाहे की हत्या करवा दी। जब इसकी जानकारी मैग्नोलिया को हुई तब वह गुस्से से आग बबूला हो गई , इसके बाद वह अपने घोड़े के साथ उसी Sunset Point 🌄 के पास पहुंची और अपने घोड़ा सहित पहाड़ से कूद कर अपनी जान दे दी।

Sunset Point 🌄 में वह पत्थर आज भी मौजूद है, जहां पर बैठकर चरवाहा बांसुरी बजाता था और मैग्नोलिया उस के पास बैठकर बांसुरी की मधुर धुन को सुना करती थी। इसी जगह पर मैग्नोलिया व चरवाहे की प्रतिमा स्थापित है, जो दोनों की प्रेम कहानी (Love ❤️ Story) की गवाही देती है। साथ ही इन दोनों के प्रतिमा के कुछ दूरी पर मैग्नोलिया के घोड़े की प्रतिमा भी बनाया गया है।

सनराइज प्वाइंट (Sunrise 🌅 Point)

हमलोगों में से कुछ ने भगवान हनुमान के बारे में एक लोकप्रिय कहानी (popular Story) तो सुनी ही होगी कि उन्होंने एक बार सूर्य को कोई एक सुंदर गोल फल समझकर निगल लिया था। लोगों का ऐसा मानना है कि जिस जगह उन्होंने सूरज को खाया यानी आपने मुंह में निगल लिया वह जगह कोई दूसरा नहीं बल्कि Netarhat ही था। 

भगवान वीर हनुमान का जन्म हमारे झारखंड के गुमला जिले के अंजन गांव में हुआ था, जिसे आजकल अंजनी धाम के नाम से प्रसिद्ध है। इसके चलते लोगों को पुरा विश्वास हो जाता है कि नेतरहाट ही वो जगह है जहां पर ऐसा हुआ था। तो यह कहने की कोई जरूरत ही नहीं है कि नेतरहाट में सूर्योदय (Sunrise 🌅) और सूर्यास्त (Sunset 🌄) कितना सुंदर होता है, यहां पर ख़ुद भगवान भी अचंभित हो जाते थे। नेतरहाट में सूर्योदय देखने के लिए सूर्योदय बिंदु (Sunrise 🌅 Point) सबसे अच्छा है। 

कोयल दृश्य बिंदु (Koyal View Point)

शांति प्रेमियों (Silent Lover’s) के लिए कोयल दृश्य बिंदु (Koyal View Point) एक बहुत ही अच्छा जगह है। शहरों की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी से दूर यहां के हरे-भरे घने जंगल से बहती हुई शांत कोयल नदी (Koyal River) का शानदार नजारा को देख सकते हैं।

नाशपाती के बाग

नाशपाती के बाग तो मानो नेतरहाट का शान है, इस जगह का नाशपाती खाने में काफ़ी मीठा होता है। इस जगह आने के बाद आप बिलकुल फ्री में नाशपाती खा सकते हैं । हां , अगर आप पैसा देने में सक्षम हैं तो यहां के किसानों तथा इसके देख-रेख करने वाले को आप इस फल का मूल्य अवश्य चुका दें। 

देवदार एवं चीड़ के जंगल –

देवदार एवं चीड़ के जंगल ऐसे सहायक वन हैं जो नेतरहाट की सुंदरता को और भी बढ़ाते हैं। इस वन के लंबे – लंबे चीड़ के पेड़ और देवदार के घने बाग इसे एक बेहतरीन जगह बनाते हैं। यहां पर आप फ़ोटो तथा वीडियो भी शूट कर सकते हैं, इसके लिए ये जगह काफ़ी अच्छा है।

नेतरहाट में चीड़ के जंगल एक ऐसी जगह है जहाँ पर आप Adventure Tracking का भरपूर मजा ले सकते हैं। चीड़ वन में Tracking करना तथा यहां के प्राकृतिक नज़रों का आनंद लेना आपके लिए बेहद खास साबित हो सकता है। इस क्षेत्र में मौसम ज्यादातर ठंडा रहता है जो शहर की तुलना में काफी सुखद महसूस कराता है। 

शैले हाउस (Shaile House) –

शैले हाउस (Shaile House), नेतरहाट में लकड़ी से बना बंगला है जो कि उस समय का काफ़ी अच्छा बंगला माना जाता है। यह ब्रिटिश सरकार के द्वारा भारत के बंगाल प्रेसीडेंसी (President) के दौरान बिहार और उड़ीसा के लेफ्टिनेंट-गवर्नर “सर एडवर्ड अल्बर्ट गैट” (Lefitnent Governor “Sir Adward Albert Gait”) के शासन काल के दौरान बनाया गया था। जो – जो ब्रिटिश अधिकारी Netarhat को पसंद करते थे उसके लिए यह बंगला समर हाउस (Summer House) था।

लोध फॉल / बूढ़ा घाघ जलप्रपात –

 लोध जलप्रपात झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात और पूरे भारत का 21वां सबसे ऊंचा जलप्रपात है। इस फॉल की विशेषता है कि फॉल में कई बूंदें हैं, जो पहाड़ियों के दोनों किनारों से एक के बाद एक कम दूरी के भीतर गिरती हैं। 

Netarhat - Queen of Chhotanagpur

इस फॉल का सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी गहराई का पता आज तक नहीं चल पाया है और बहुत कोशिशों के बावजूद कोई भी कभी भी गहराई को मापने में सफल नहीं होता है। लोध जलप्रपात नेतरहाट से 70 KM की दूरी पर स्थित है। 

निचला घाघरी जलप्रपात (Lower Ghaghri Fall)

निचला घाघरी जलप्रपात Netarhat से क़रीब 10 KM की दूरी पर स्थित है, जो कि काफ़ी घने जंगलों से चारों ओर से घिरा हुआ है। ये फॉल भी पहाड़ी से नीचे अपना रास्ता बनाकर आगे की ओर बढ़ने लगती है। निचला घाघरी झरना, नेतरहाट के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में से एक है जहाँ की यात्रा आपको अवश्य करनी चाहिए।

निचला घाघरी झरना काफ़ी घने जंगल में स्थित एक ऐसी जगह है जहाँ पर लगभग 32 फीट ऊपर से पानी गिरता है। ये झरना जंगल के बीचों – बीच से अपना रास्ता बनाते हुए एक छोटी नदी के रूप में नजर आती है। इस झरने के दोनों किनारों पर पेड़ – पौधे भरे पड़े हैं जो इसे और भी ज्यादा खूबसूरत बनाते हैं। निचला घघरी जलप्रपात Netarhat से लगभग 10 किलोमीटर दूर पर स्थित है।

ऊपर घघरी जलप्रपात (Upper Ghaghri Fall) –

ऊपरी घाघरी एक छोटा सा जलप्रपात है जो नेतरहाट के Hill Station से महज़ 4 KM की दूरी पर स्थित है। घाघरी नदी लातेहार जिले में दो झरनों को जन्म देती है, अर्थात् ऊपरी घाघरी जलप्रपात और निचला घाघरी जलप्रपात। पतझड़ की मौसम में इस जगह पर पिकनिक मानना काफ़ी अच्छा होता है। ऊपरी घाघरी जलप्रपात भी Netarhat के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। इस झरने के दोनों तरफ बहुत सारे पेड़ – पौधे भरे पड़े हैं जो कि इसकी खूबसूरती को दुगुनी कर देता है। हरी – भरी घाटी के बीच साफ़ नीला आकाश के नीचे स्थित यह एक खूबसूरत जगह है। इस जगह की यात्रा भी आपको जरुर करनी चाहिए। 

सदानी फॉल्स (Sadani Fall) – 

झारखंड के गुमला जिले में स्थित सदानी जलप्रपात कभी हीरे के भंडार का केंद्र हुआ करता था। सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के दौरान, इस स्थान पर कुछ दुर्लभ और बड़े हीरे का उत्पादन हुआ करता था। सदानी फॉल बिलकुल सांप की तरह दिखती है, जिसे दूर से देखने पर प्रतीत होता है कि पहाड़ियों से नीचे कोई सांफ फिसल रहा है। सदानी जलप्रपात, नेतरहाट से क़रीब 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

सुरकाई घाघरी जलप्रपात (Surkai Ghaghri Fall) –

 सुरकाई घाघरी जलप्रपात नेतरहाट के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। ये फॉल भी जंगलों के बीचों – बीच पर स्थित है, इसके दोनों किनारे हरे – भरे पेड़ – पौधे से भरे पड़े हैं। नेतरहाट के पास अगर देखने के लिए सबसे अच्छी जगहों की खोज करते हैं तो आप इस जलप्रपात को भी अवश्य देखें। इस तरह से अछूते जलप्रपात को निश्चित रूप से अधिक से अधिक पर्यटकों के ध्यान की आवश्यकता होती है। ये फॉल लगभग Netarhat से 58 किमी की दूरी पर स्थित है।

नेतरहाट का मौसम (Whether of Netarhat)  

नेतरहाट का मौसम ग्रीष्मकाल यानि मार्च से जून के महीने में 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच तापमान रहता है। बरसात का मौसम यानि जुलाई – अक्टूबर के महीने तक जारी रहता है। सर्दियों का मौसम यानि नवंबर से फरवरी के बीच होता है और तापमान 8 से 12 डिग्री सेंटीग्रेड तक गिर जाता है।

नेतरहाट कैसे पहुंचें ?

यह डालटनगंज से 117 किमी, रांची से 152 किमी, और लोहरदगा से 82 किमी से है।  

By Air :- 

  • Nearest Airport – 
    • Birsa Munda International Airport, Ranchi – 155 Kilometres (3hr 47 min)

By Train :- 

  • Nearest Railway Station –
    • Ranchi Railway Station – 153 Kilometres
    • Hatia Railway Station – 157 Kilometres

By Bus :- 

  • Nearest Bus Stand –               
    • Khadgada (Kantatoli) Bus Stand, Ranchi – 155 kilometres 
    • Daltanganj Bus Stand – 117 kilometres
    • Gumla Bus Stand – 70 kilometres

नेतरहाट, रांची घाघरा – नेतरहाट रोड रास्ते से पहुंचा जा सकता है। इसके सबसे सामने लोध फॉल पयर्टन स्थल है। नेतरहाट तक पहुंचने के लिए पर्यटक निजी वाहन किराए पर ले सकते हैं। जैसे – Taxi , Ola , Uber आदि।

नेतरहाट / Netarhat घूमने का सबसे अच्छा समय –

 नेतरहाट घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से अप्रैल के महीनों में होता है, क्योंकि इस समय न तो ज्यादा गर्मी होती है और न ही ज्यादा ठंडा। हालांकि, अगर आप Winter ❄️ Lover हैं यानि सर्दियों का आनंद लेने के लिए जाते हैं तो आप नवंबर से फरवरी के महीनों के बीच जाइए ये सबसे अच्छा समय होता है। अगर आप Rainy Lover हैं तो आप जुलाई से सितम्बर के मानसून के महीनों के दौरान आप यात्रा कर सकते हैं हां लेकिन इस समय बहुत खतरनाक साबित हो सकता है अगर आप ध्यान से यात्रा नहीं करते हैं तो।

नेतरहाट में सालों भर आते हैं पर्यटक –

नेतरहाट में यूं तो सालों भर सैलानियों का आना-जाना होता है, लेकिन ख़ास तौर पर नवंबर से मार्च के महीना तक देश-विदेश के सैलानी यहां की मनोरम छटा देखने के लिए आते हैं। यहां पर सबसे अधिक सैलानियों को भाने वाला स्थान है Sunset 🌄 Point तथा Sunrise 🌅 Point । इसके अलावा यहां पर जलप्रपात, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, रंग बिरंगे पक्षियों का संगम कहीं दूसरी जगह में भी देखने को नहीं मिलता है।

विदेशों से भी आते हैं सैलानी –

यहां पर हर साल पर्यटक के रूप में देश – विदेश से लोगों का आना – जाना लगा रहता है । इस बहुचर्चित नेतरहाट में सबसे अधिक कोलकता और मुंबई आदि से लोग आते हैं तथा इसके अलावा थाइलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, जापान समेत कई देशों के सैलानी यहां पहुंचते हैं।

नेतरहाट के होटल एवं रेस्टोरेंट वालों की चांदी – चांदी हो जाती है –

सीजन के अनुसार यहां के होटल और रेस्टोरंट में काफी भीड़ बढ़ जाती है। देश-विदेश के सैलानी (Tourists) यहां की मनोरम वादियों का आंनद लेने के लिए कई दिनों तक यहां समय बिताते हैं। इसी कारण यहां के होटल एवं रेस्टोरंट मालिकों की चांदी – चांदी हो जाती है। इसके अलावा यहां के छोटे – छोटे दुकानदारों की भी बिक्री काफ़ी बढ़ जाती है। यहां के होटल संचालकों का कहना है कि हमलोगों की जीविका सैलानियों पर ही टिकी है। ये खूबसूरत जगह होने के कारण यहां पर सैलानी दूर-दूर से आते हैं। कई सैलानी तो Advance Booking कर देते हैं।

नेतरहाट / Netarhat में क्या -क्या कमियां हैं ?

 झारखंड सरकार (Jharkhand Government) के पर्यटन विभाग Jharkhand Tourism Development Corporation (JTDC) की योजना के अनुसार, Netarhat को बहुत सारी सुविधाएं तो पहले से हैं । जैसे यहां पर KIOSK, Restaurants, Guests House, Toilet, Fast Food Stalls, Light House & Watch Tower (View Point) ये सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सारी चीजों को एक बार अच्छा से Repairing की जरूरत है ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को कुछ दिक्कत ना हो।

लोध जलप्रपात (Lodh Waterfalls) में क्या -क्या कमियां हैं ?

 झारखंड सरकार (Jharkhand Government) के पर्यटन विभाग Jharkhand Tourism Development Corporation (JTDC) की योजना के अनुसार, हिरनी जलप्रपात को बहुत सारी सुविधाओं की ज़रूरत है। जैसे यहां पर एक KIOSK, Restaurants, Guests House, Toilet, Fast Food Stalls, Light House & Watch Tower (View Point) लगना चाहिए।

नेतरहाट जाने के पहले इन बातों को जरुर जानें – 

  • यहां पर जब जी जाते हैं आपने दोस्तों के साथ या आपने परिवारों के साथ जाएं , क्योंकि ये जगह समूह में जाने से वो मज़ा दुगुनी हो जाती है।
  • यात्रा का सबसे अच्छा समय मार्च – अप्रैल महीना के बीच है।
  • Picnic & Nature Advantures के लिए ये जगह काफ़ी अच्छी जगह है।
  • ज्यादा घने जंगलों में न जाएं और न ही ऊंचे चट्टानों पर चढ़ें।
  • वैसे तो देख रेख के लिए आदमी है फिर भी अपनी सुरक्षा खुद से करें।
  • रात को यात्रा करने से बचें , सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक अच्छा समय है।

नेतरहाट / Netarhat जाते समय कहाँ ठहरें?

होटल 🏨 (Hotel) –

होटल प्रभात विहार डीलक्स जो कि झारखंड पर्यटन विकास निगम (Jharkhand Tourism Development Corporation ) (JTDC) द्वारा नेतरहाट में Sunrise 🌅 Point के पास संचालित एक होटल है। यह होटल लगभग सभी पर्यटन स्थलों और नेतरहाट बस स्टैंड के निकट है। इस होटल में आप Online Booking भी कर सकते हैं, इसके लिए आपको झारखंड पर्यटन (Jharkhand Tourism) की आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर जाना होगा।

डाक बंगला एक और होटल है जिसे Netarhat जाने के दौरान ठहर सकते हैं। ये होटल लातेहार पर्यटन (Lathehar Tourism) के द्वारा चलाया जाता है। इस होटल पर भी आप Online Booking कर सकते हैं, इसके लिए आपको लातेहार पर्यटन (Latehar Tourism) की आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर जाना होगा ।

तंबू ⛺ (Tent ) –

झारखंड पर्यटन विकास निगम (Jharkhand Tourism Development Corporation ) (JTDC) के द्वारा ही ये सिस्टम चलाया जाता है। यहां पर पर्यटकों को एक अलग अनुभव देने के लिए स्विस कॉटेज टेंट (Swish Cottage Tent) की सुविधा भी प्रदान करता है। इसे भी आप Online Booking कर सकते हैं, इसके लिए आपको झारखंड पर्यटन (Jharkhand Tourism) की आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर जाना होगा।

निष्कर्ष :- 

आज इस Article में विस्तार से बताया :- Netarhat कहां स्थित है ?, नेतरहाट का इतिहास क्या है ? नेतरहाट कैसे पहुंचे ?, नेतरहाट का मौसम कैसा रहता है ? , Netarhat के सामने कौन सा पर्यटन स्थल है ? तथा इसके अलावे अनेकों जानकारियां जो आपको जाननी चाहिए। 

तो ये जानकारी आपको कैसी लगी आप हमें Comments में बता सकते हैं तथा पसंद आई तो अपने दोस्तों को भी Share कर सकते हैं। साथ ही साथ हमारी हर Post की जानकारी सबसे पहले पाने के लिए Subscribe Box में अपना Email Id डाल कर Subscribe कर सकते हैं। 

FAQs

Ranchi से Netarhat की दुरी कितनी है ?

झारखंड की राजधानी रांची से 156 किमी पश्चिम में लातेहार जिले में नेतरहाट स्थित है।

नेतरहाट का मतलब क्या है ?

नेतरहाट शब्द की उत्पति मूलतः ‘नेतुर और हातु‘ शब्द के मिलने से हुआ है। नेतुर का अर्थ होता है बांस और हातु का मतलब बाजार

नेतरहाट को कौन -कौन से नाम से जाना जाता है ?

नेतरहाट को छोटानागपुर की रानी ( Netarhat – Queen of Chhotanagpur ) या ( Netarhat – The Hill Station of Jharkhand ) का नाम दिया है ।

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