झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) राज्य का सबसे बड़ा और प्रमुख सरकारी अस्पताल है।
यहां हर दिन झारखन्ड ही नही बल्की अन्ये राज्यो से 5000 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं — लेकिन असलियत ये है कि रिम्स की हालत खुद “बीमार” हो चुकी है। अस्पताल में न सिर्फ डॉक्टरों की भारी कमी है, बल्कि MRI, CT Scan, ICU जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाएं या तो खराब है या बहुत सीमित।
👨⚕️ डॉक्टरों की भारी कमी: मरीजो के इलाज मे समस्या
रिम्स में 41 विभाग हैं, लेकिन डॉक्टरों की तैनाती के मामले में हालात बेहद चिंताजनक हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
- कुल 759 स्वीकृत पदों में से 259 पद खाली हैं।
- कई विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और रेजिडेंट डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं।
- ऑपरेशन और इमरजेंसी में देरी आम बात हो गई है।
उदाहरण
| विभाग | ज़रूरत | उपलब्ध | कमी |
|---|---|---|---|
| न्यूरोसर्जरी | 10 | 4 | 6 |
| ऑर्थोपेडिक | 12 | 6 | 6 |
| कार्डियोलॉजी | 8 | 3 | 5 |
| पीडियाट्रिक | 10 | 5 | 5 |
🗣 “OPD में डॉक्टर 2 घंटे में 100 से ज़्यादा मरीज देखते है। कैसे सही इलाज होगा?” — एक वरिष्ठ नर्स, नाम न छापने की शर्त पर।
🧪 मशीनों का हाल: आधी मशीने खराब
🔴 MRI मशीन:
- ORS पोर्टल से अपने आधार नम्बर या मो. नम्बर से स्थीति पता करना पडता है।
- लोगो की लम्बी – लम्बी लाईने ।
- मरीजों को प्राईवेट अस्पतालो पर ₹5000-₹7000 खर्च कर MRI करवाना पड़ता है।
- गरीब मरीज इलाज से वंचित हो जाते हैं।
🟠 CT Scan और X-Ray:
- केवल एक CT स्कैन मशीन — वह भी ओवरलोड।
- रिपोर्ट के लिए 3 से 7 दिन का इंतज़ार।
- X-Ray मशीनें भी पुरानी, डिजिटल सिस्टम सीमित।
- CT-Scan का खर्च 700-1500 रु के बिच
🟡 ICU, ECG, EEG:
- ICU बेड कम, ऑक्सीजन मॉनिटरिंग उपकरणों में बार-बार खराबी।
- एक ICU मे एक से अधिक मरीज होते है।
- EEG और ECG मशीनें कुछ ही विभागों में उपलब्ध।
🏢 प्रशासन की निष्क्रियता
- 2024 में MRI मशीन इंस्टॉलेशन का वादा किया गया था।
- पाँच unsuccessful टेंडर और लम्बा procurement process समस्या का कारण ।
- आज जून 2025 आ गया, लेकिन मशीन चालू नहीं हुई।
- डॉक्टरों की बहाली प्रक्रिया फाइलों में उलझी पड़ी है।
🗣 “टेंडर पास हुआ है, पर मशीन आएगी कब — कोई नहीं जानता।”
– रिम्स के एक अधिकारी
🚯अस्पताल परिसर मे भारी गंदगी
अस्पताल के परिसर मे अतिक्रण कर कई अनगीनत दुकाने है ।अतिक्रमण कर लगये गये दुकाने भारी गंदगी का कारण बनते है ।जल निकासी का उचीत प्रबन्ध नही है।
✅ समाधान
- खाली पदों पर तत्काल बहाली की जाए।
- MRI, CT, ICU जैसी मशीनें तीव्र गति से स्थापित हों।
- हर विभाग में डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाए।
- मरीजों के लिए सहायता केंद्र और हेल्पलाइन नंबर चालू किए जाएं।
- हर विभाग और सार्वजनिक जगह पर मे CCTV कैमरा लगाया जाये ।
- अतिक्रमण कर सरकारी अस्पतालो के परिसर मे लगाये गये दुकानो को हटाये।




