•   सरहुल पर्व क्या है       

सरहुल का अर्थ है प्रकृति के प्रति कृतज्ञता(gratitude) को प्रकट करना यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल की तृतीया को मनाया जाता है जब पेड़ पौधो मे नए पुष्प, शाखाओ मे कोमल पत्ते, और पूरा जंगल मानो दुल्हन की तरह से सजी हो तब इस पर्व को मनाया जाता है l

इस वर्ष यह पर्व दिनांक-21-03-2026 को मनाया जाएगा

  •         सरहुल पर्व की सुरवात कब से मनाई जाती है

सरहुल पर्व की सुरुवात हजारो साल पहले से आदिवासी समाज द्वारा मनाया जा रहा है l

  • सरहुल जुलूस पर्व की शुरुवात कब हुई

सरहुल पर्व की शुरुवात 1960 मे स्वर्गीय बाबा कार्तिक उराँव जी ने केंद्रीय सिरमटोली सरना स्थल से की  थी, स्वर्गीय बाबा कार्तिक उराँव जी ने इस पर्व की शुरूवात आदिवासीयो की सामाजिक न्याय, एकता और आदिवासी पहचान संरक्षण के लिये की थी ।

  •  क्यो मानाते है सरहुल पर्व

आदिवासी समाज का पूरा जीवन काल प्राकृति पर ही निर्भर है जन्म से मृत्यु तक वह प्रकर्ति से ही सिखाता है,और प्रकर्ति को माँ ( सरना माँ, चाला आयो, सिंगबोनगा ) मानता है, इस कारण वह प्रकर्ति को आभार प्रकट करने के लिए सरहुल पर्व मनाता है l

इस दिन से नए साल का प्रारंभ मानते है , प्रकृति की पूजा, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक एकता, संस्कृति और परंपरानववर्ष, मौसम की भविष्यवाणी के लिये मानाते है

  • सरहुल के दिन से किसकी शुरुआत मानी जाती है?

आदीवासी समाज सरहुल पर्व मे सूर्य और धरती का विवाह करते है ,और इस दिन से नए साल का प्रारंभ मानते है

क्योंकि इस दिन से पेड़ पौधों मे फूल , नए पत्ती , और फल आते है l

सरहुल महोत्सव कहाँ मनाया जाता है?

प्रत्येक गाँव मे एक अखाड़ा होता है जहां पर सरहुल पर्व मानाया जाता है l आदिवासी अपने वेशभुसा में ढोल ,मांदर और नगाड़े के साथ अपनी लोकप्रिय सरहुल गीत और सरहुल नृत्य ”जादुर” करते है l

  • सरहुल का त्योहार में कौन से पेड़ की पूजा की जाती है?

सरहुल पर्व मे साल या सखुवा के पेड़ की पूजा की जाती है, इस समय पर सखुवा के पेड़ से पुष्प आना प्रारम्भ हो जाता है ,कोमल पत्ते आना शुरू हो जाता है , इस सखुवा के पुष्प को सरहुल की दिन में कान में लगते है l

  • कौन सी जनजाति साल के पेड़ की पूजा करते है l

साल के पेड़ की पूजा -संथाल ,मुंडा, हो, उरॉव,आदि जनजातीया जो झारखंड , बिहार , छतीशगड,मध्यप्रदेश,पश्चिम बंगाल,और आसाम जैसे राज्यों मे आदिवासी जनजातियों द्वारा पूजा की जाती है l

  • सरहुल में किस भगवान की पूजा की जाती है?

मुख्य रूप से आदिवासी समाज अपने पुरखों और प्रकर्ति की पूजा करते है प्रकर्ति को ही ”सरना माँ” या ”सिंगबोनगा” या ”चाला आयो” मानकर प्रकर्ति की पूजा करते है l

सरहुल पर्व कितने दिनों तक मनाया जाता है?

सरहुल पर्व मुख्य रूप से 3 दिन तक मनाया जाता है पहले दिन नव युवक केकड़ा -मछली पकड़ने के लिए नदी ,तालाब मे जाते है l

दूसरे दिन बुजुर्ग या पाहन उपवास रखते है , पाहन दो घड़े लेकर नदी या कुँवा से पानी भरकर पवित्र सरना स्थल मे रखते है , फिर पाहन अपने विधि -विधान से 5 मुर्गा -मुर्गियों का बलि देता है और अपने पुरखों का स्मरण करता है l

तीसरे दिन अपने परिजनों , सगी -संबंदियों के साथ बलि मुर्गे -मुर्गियों का शेवन करते है l


      झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) राज्य का सबसे बड़ा और प्रमुख सरकारी अस्पताल है। 

यहां हर दिन झारखन्ड ही नही बल्की अन्ये राज्यो से  5000  से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं — लेकिन असलियत ये है कि रिम्स की हालत खुद “बीमार” हो चुकी है। अस्पताल में न सिर्फ डॉक्टरों की भारी कमी है, बल्कि MRI, CT Scan, ICU जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाएं या तो खराब है या बहुत सीमित।

 

👨‍⚕️ डॉक्टरों की भारी कमी: मरीजो के इलाज मे समस्या

रिम्स में 41 विभाग हैं, लेकिन डॉक्टरों की तैनाती के मामले में हालात बेहद चिंताजनक हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:

    • कुल 759 स्वीकृत पदों में से 259 पद खाली हैं।

    • कई विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और रेजिडेंट डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं।

    • ऑपरेशन और इमरजेंसी में देरी आम बात हो गई है।                                                                            

 उदाहरण  

  विभाग    ज़रूरत उपलब्ध                              कमी
न्यूरोसर्जरी                                        10                                    4 6
ऑर्थोपेडिक 12 6 6
कार्डियोलॉजी 8 3 5
पीडियाट्रिक 10 5 5

🗣 “OPD में डॉक्टर 2 घंटे में 100 से ज़्यादा मरीज देखते है। कैसे सही इलाज होगा?” — एक वरिष्ठ नर्स, नाम न छापने की शर्त पर।

🧪 मशीनों का हाल: आधी मशीने खराब

🔴 MRI मशीन:

    • ORS पोर्टल से अपने आधार नम्बर या मो. नम्बर से स्थीति पता करना पडता है।

    • लोगो की लम्बी – लम्बी लाईने ।

    • मरीजों को प्राईवेट अस्पतालो पर ₹5000-₹7000 खर्च कर MRI करवाना पड़ता है।

    • गरीब मरीज इलाज से वंचित हो जाते हैं।                                                                                                                                                                                                                                                                                    

🟠 CT Scan और X-Ray:

    • केवल एक CT स्कैन मशीन — वह भी ओवरलोड।

    • रिपोर्ट के लिए 3 से 7 दिन का इंतज़ार।

    • X-Ray मशीनें भी पुरानी, डिजिटल सिस्टम सीमित।

    • CT-Scan का खर्च 700-1500 रु के बिच                                                                                                                                       

🟡 ICU, ECG, EEG:

    • ICU बेड कम, ऑक्सीजन मॉनिटरिंग उपकरणों में बार-बार खराबी।

    • एक ICU मे एक से अधिक मरीज होते है।

    • EEG और ECG मशीनें कुछ ही विभागों में उपलब्ध।                                                                                                                                                                                                                              

🏢 प्रशासन की निष्क्रियता

    • 2024 में MRI मशीन इंस्टॉलेशन का वादा किया गया था।

    • पाँच unsuccessful टेंडर और लम्बा procurement process समस्या का कारण ।

    • आज जून 2025 आ गया, लेकिन मशीन चालू नहीं हुई।

    • डॉक्टरों की बहाली प्रक्रिया फाइलों में उलझी पड़ी है।

  🗣 “टेंडर पास हुआ है, पर मशीन आएगी कब — कोई नहीं जानता।”

                                                               – रिम्स के एक अधिकारी 

 

   🚯अस्पताल परिसर मे भारी गंदगी                                                                                        

अस्पताल के परिसर मे अतिक्रण कर कई अनगीनत दुकाने है ।अतिक्रमण कर लगये गये दुकाने भारी गंदगी का कारण बनते है ।जल निकासी का उचीत प्रबन्ध नही है।                                   

✅ समाधान                                                                                                          

    • खाली पदों पर तत्काल बहाली की जाए।

    • MRI, CT, ICU जैसी मशीनें तीव्र गति से स्थापित हों।

    • हर विभाग में डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाए।

    • मरीजों के लिए सहायता केंद्र और हेल्पलाइन नंबर चालू किए जाएं।

    • हर विभाग और सार्वजनिक जगह पर मे CCTV कैमरा लगाया जाये ।
    •    अतिक्रमण कर सरकारी अस्पतालो के परिसर मे लगाये गये दुकानो को हटाये।  
 

🔚 निष्कर्ष

रिम्स, रांची जैसे सरकारी संस्थान में जब न डॉक्टर हों, न मशीनें — तो गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सरकारी अस्पतालों पर विश्वास कैसे बनेगा? यह समय है कि सरकार और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाएं और इस चिकित्सकीय आपातकाल से लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधाये दे।              

                                                                                                                                                   

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सरहुल पर्व : आदिवासी और प्रकर्ति का अटूट रिस्ता

इस आर्टिकल मे पूरे झारखंड सहित पूरे भारत मे मनाया जाने वाला पर्व सरहुल के बारे मे बताया गया है और अधिक जानकारी के लिए आर्टिकल जरूर पड़े धन्यवाद l

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