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वो लोग जो किसी भौगोलिक क्षेत्र मे आदि काल से वास करते है, जिनकी पूरी जीवन शैली प्रकर्ति पर निर्भर है,जो जल-जंगल-जमीन को ही अपना सब कुछ मानते हैं आदिवासी हैं, झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सूरेन के द्वारा दिनांक-3/05/2026 को देश के राष्ट्र पति जी को 2027 के जनगणना मे आदिवाशी/सरना धर्म कोड निर्धारित करने का अनुरोध किया है l |
आदिवासी अन्य धर्मों से कैसे भिन्न है ?

- आदिवासी का मानना है की हम अन्य धर्मों की तरह न तो मूर्ति पूजक है और ना ही कोई ग्रंथ,बाइबल, कुरान की भांति कोई लिखित दस्तावेज है l
- आदिवासी प्रकार्ति के साथ-साथ अपने पूर्वजों को मानते है,प्राकर्तिक के इर्द-गिर्द ही इनका जीवन व्यतीत होती है ,आदिवासी का त्यौहार प्राकर्ति को समर्पित होती है l
- जन्म से लेकर मृत्यु तक पूरा रीति -रिवाज,परम्परा सब प्राकर्ति से उत्प्रेरित रहती है आदिवासी का प्रमुख त्यौहार -कर्म, सरहुल,बहा,जीतिया आदि इन कारणों से आदिवासी खुद को दूसरे धर्मों से अलग मानते है l
क्यों नहीं आदिवासी या सरना धर्म कोड लागू हो पा रहा है ?
- कई राज्यों मे आदिवासी बाहुल्य जगहों पर आदिवासी के हितेसी नाम पर कई पार्टी बनती है और चुनाव भी आदिवायो के समर्थन से जीतते है फिर भी कोड लाघू नहीं हो पा रहा है, यह पार्टी चुनाव जीतने के बाद आदिवसियों से किए वादे भूल जाते है , और सिर्फ अपने पार्टी के लिए काम करते l

- आदिवासी समाज मे एक जुटता नहीं है,समाज केवल अपने-अपने क्षेत्रीय धर्म को ही मानते है जैसे-झारखंड के आदिवासी जायदा तर सरना धर्म को मानते है
- वैसे ही बिहार के आदिवासी कोई और धर्म इसी प्रकार छतीसगढ़,पश्चिम बंगाल,मध्य प्रदेश उड़ीसा,असम,गुजरात आदि यह केवल अपने क्षेत्रीय धर्म, संस्कृति को ही जानते-मानते है इस वजह से भी l
- धर्मआन्तरण के कारण बहुत से आदिवासी अपनी धर्म संस्कृति को छोड़कर दूसरे धर्म को अपना लिए है l
- विश्व हिन्दू परिसद (RSS) आदिवासी को हिन्दू मानते है और आदिवासी कोड का पूरी तरह से विरोध करते है l
- केंद्र सरकार को कई बार आदिवासी कोड के लिए राज्य सरकार ने बिल पास किया परंतु केंद्र सरकार ने इसे खरिच कर दिया l
धर्म कोड लागू होने से आदिवासीयो को क्या लाभ होगा

- आदिवासीयो की विशिस्ट पहचान होगी
- आदिवासीयो की सही जनसंख्या की पहचान होगी
- सरकार द्वारा दी जाने वाली आरक्षण का लाभ होगा
- संस्कृति का सरक्षण होगा
- विशिष्ट पहचान होगा
- सटीक जनसंख्या का माप
- अस्तित्व की रक्षा
- धर्मंत्रण पर रो होगी
- भाषा और इतिहास का सरक्षण
वर्तमान स्थिति आदिवासी धर्म कोड की :
- महाराष्ट्र के नासिक मे आदिवासी/सरना धर्म कोड 2027 मे होने वाले जनगणना को लेकर आदिवासी समाज 17-मई-2026 को एक जुट हुवे थे l
- लकी भाई जाधव के अध्यक्षता मे आयोजित हुवे इस सम्मेलन मे भारत के लगभग सभी राज्यों से जैसे झारखंड के पूर्व शिक्षा मंत्री- गीताश्री उराँव, पर्व मंत्री-देव कुमार धान और प्रेम साही मुंडा जी भी उपस्थित थे l
- इस सम्मेलन के माध्ययम से होने वाले जनगणना मे आदिवासियों से अपनी सही पहचान,धर्म ,संस्कृति,जाति की सही जानकारी देने की बात कही l
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