
झारखण्ड राज्य मे युवाओ के लिये सरकारी नोकरी पाने का एक प्रमूख माध्यम है झारखण्ड लोक सेवा अयोग (JPSC) और झारखण्ड कर्मचारी चयन अयोग (JSSC) इनका गठन 2000 और 2008 मे हुवा था ताकि पारदर्शी और निष्पक्ष तरिके से भरतीयाँ की जा सके लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसका नाम पेपर लीक, रिश्वत, और धांधली के मामलों में बार-बार सामने आया है।
📝घोटाले की सूची :
| वर्ष | परिक्षा | घोटाले की प्रक्रति | |
| 2007-8 | 5वी JPSC | कूछ उम्मीद्वारो को अनुचित लाभ पहुचाने और चयन प्रक्रिया मे अनियमितताओ की बात सामने आई थी. कुछ लोगो पर भ्रष्टाचार के अरोप लगे थी । 5 वी jpsc विवाद | |
| 2021-22 | 6वी JPSC | अधिकारियो की नियुक्ति विवाद। | |
| 2024 | छटी JPSC नियुक्ति विवाद (JSSC CGL) | प्रश्नपत्र लीक हो गया था। छटी JPSC नियुक्ति विवाद |

📋 घोटाले का पूरा प्रारुप
पेपरलीक नेटवर्क
- प्रीटींग प्रेस से लेकर परीक्षा केन्द्र तक सेटींग ।
- अंदर से ही प्रश्न पत्र लीक करना ।
2.पैसे लेकर पास करना
- 2 से 10 लाख रुपये लेकर सीट फीक्स ।
- दलाल -अधीकारी -अभ्यार्थी की तिगडी ।
3.फर्जी दस्तावेज और मार्क्स हेराफेरी
- कटऑफ से निचे वालो का चयन ।
- OMR शीट और परीणामो मे हेरफेर ।
💰नुकसान किसे
- मेहनत करने वाले छात्र सरकारी नौकरी से वंचित रह जाते हैं।
- राज्य को एक तेज, तरार, ईमादार और करमट अधिकारी नही मिल पता है।
- राज्य की छवि खराब होती है।
🔇 कार्रवाई और चुप्पी
- कुछ मामलों में केवल जांच के आदेश हुए।
- दोषी बहुत कम ही सजा तक पहुंचे।
- कार्रवाई मे देरी।
✅समाधान क्या है?
- पेपर पूरी तरह डिजिटल हो।
- सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य।
- भर्ती प्रक्रिया का ऑडिट।
- जांच एजेंसी स्वतंत्र हो।
- जनता और मीडिया की सक्रिय निगरानी।
☝निष्कर्ष:
JSSC,JPSC जैसी संस्थाएं युवाओं की उम्मीद का स्तंभ हैं। लेकिन जब यही स्तंभ गंदे सौदों का अड्डा बन जाएं, तो केवल एक परीक्षा नहीं हारती – पूरा भविष्य हार जाता है। परीचा को सम्पन्न कराने मे सभी करमचारी,आधीकारी तथा विधार्थीयो को पारदर्शीता, इमान्दारी से अपने कार्य का निर्वाह करने की अवश्यकता है,तभी राज्य और देश आगे बडेगा ।
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